जागरूकता ही बचाव है ।

“आप सब से अपील है की अपने आस पास भी इस विषय मे चर्चा करें और अपनी आस पास की महिलाओं को जो इससे गुज़र रही हैं उन्हें जागरुक करें और “सैनिटरी नैपकिन “इस्तेमाल करने के फ़ायदे बताएँ “किसी देश का विकास महिलाओं के विकास के समानुपाती होता है।समाज के रुढ़िवादी होने की कीमत अक्सर समाज के सबसे पिछड़े हिस्सों में से एक महिलाओं को चुकानी पड़ती है। पीरियड यानी माहवारी को लेकर हमारे समाज में अभी भी भ्रम है, ये एक ऐसा मुद्दा है जिसके बारे में आज भी हम खुल कर बात नहीं करते, जिसकी वजह से अक्सर ही महिलाओं को अनेक भयानक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है।ये प्राकृतिक प्रक्रिया अपने साथ कई सारी समस्याएं भी लेकर आती है। मासिक धर्म के दौरान अगर सही से रखरखाव और साफ-सफाई का ध्यान न रखा जाए तो कई तरह की गंभीर समस्याएं जन्म ले सकती हैं। ग्रामीण इलाकों में पानी, साफ सफाई, शौचालय और सही जानकारी न होने की वजह से महिलाओं में कई गंभीर बीमारियां भी हो जाती हैं। इस समस्या से निपटने के लिए सबसे सही उपाय यह होता है कि जागरूकता बढ़ाई जाए और सैनिटरी पैड्स का इस्तेमाल किया जाए। लेकिन हमारे समाज में इसके बारे में बात ही नहीं की जाती। जिससे यह एक प्रकार की भ्रांति बनकर रह जाती है।

सिल्कीअग्रवालअध्यक्ष -उम्मीद रोशनी महिला कल्याण संगठन

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